Satsang Ke Bikhre Moti

40.00

Category
Description

श्रीभाईजी (हनुमानप्रसादजी पोद्दार) के दैनिक सत्संगसे जो नोट स्वान्तःसुखाय समय-समयपर लिखे जाते रहे हैं, उन्हींको पिछले कई वर्षोंसे ‘कल्याण’ में ‘सत्संग-वाटिकाके बिखरे सुमन’ शीर्षकसे छापा जाता रहा है। कई प्रेमीजनोंके आग्रहसे उन्हींको संग्रहितकर तथा जहाँतक सम्भव था, क्रमबद्धकर कुछ नाम परिवर्तनके साथ पुस्तकाकारमें प्रस्तुत किया जा रहा है।
उक्त संग्रहका यह पहला भाग है। इसमें ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार, सन्त-महिमा, भगवत्प्रेम आदि विविध विषयोंका समावेश है, जिससे साधकोंके लिये यह विशेष कामकी चीज बन गयी है।
सत्संगकी महिमा शास्त्रोंमें भरी पड़ी है। गुसाईजीके शब्दोंमें वही फल और वही सिद्धि है, अन्य साधन तो सब फूलके समान हैं—
**सत्संगति मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला ॥
एक विशुद्ध हृदयके विशुद्ध उद्गारोंसे जनताका परम मंगल होगा, इसी भावसे प्रेरित होकर यह संग्रह प्रकाशित किया जा रहा है। यदि इससे कुछ भी लोक-कल्याण हुआ तो संग्रहकर्ता अपने प्रयासको सफल समझेगा।

Related Products
Shopping cart0
There are no products in the cart!
Search Products
×